बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। दिनांक 17 मार्च 2026 को चाइल्ड लाइन बिलासपुर (1098) को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर ग्राम लमकेना, थाना कोटा में एक टीम ने दबिश दी। सूचना मिली थी कि क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की का विवाह कराया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए चाइल्ड लाइन बिलासपुर और जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम तत्काल मौके पर पहुँची। इस टीम के साथ क्षेत्रीय पर्यवेक्षक श्रीमती श्वेता सिंह बैस, चाइल्ड हेल्पलाइन से श्वेता गुप्ता, जिला बाल संरक्षण इकाई से अमित भोई, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गिरिजा क्षत्रिय, ग्राम सरपंच श्रीमती लक्ष्मी संतकुमार अनंत, सचिव दुकाल दास अनंत, उपसरपंच जगदीश प्रसाद साहू और कोटा थाने का पुलिस बल भी मौजूद रहा।

जांच के दौरान टीम को पता चला कि बालिका जिसकी उम्र मात्र 16 वर्ष 4 माह है, उसका विवाह 12 मार्च 2026 को अजीत बसोड़ (उम्र 22 वर्ष) के साथ संपन्न कराया जा चुका था। टीम ने तत्काल बालिका के निवास स्थान पर पहुँचकर परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह किया जा सकता है।

टीम द्वारा की गई काउंसलिंग और कानूनी समझाइश के बाद परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार की। प्रशासन के निर्देशानुसार, फिलहाल बालिका और उसके पति को अलग-अलग उनके माता-पिता के घर रहने के लिए कहा गया है। परिजनों ने यह वचन दिया है कि बालिका की आयु 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही उसे उसकी ससुराल भेजा जाएगा। इस पूरी कार्रवाई के दौरान बालिका के माता-पिता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी पंचनामे में लिए गए हैं।
