बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित सिम्स हॉस्पिटल के डायरेक्टर और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. भानु प्रताप सिंह एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गए हैं।
आवेदक शक्ति कुमार बघेल ने गृहमंत्री, डीजीपी और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को पत्र लिखकर डॉ. सिंह के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचना (Forgery) और गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
एक ही समय में दो जगहों से वेतन लेने का आरोप
जांच प्रतिवेदन और शिकायत के अनुसार, डॉ. सिंह ने 1997-98 में शासकीय सेवा में रहते हुए भी अवैध रूप से रेलवे हॉस्पिटल बिलासपुर में संविदा पर कार्य किया। आरोप है कि उन्होंने तथ्यों को छुपाकर दो अलग-अलग सरकारी विभागों से लाभ प्राप्त किया। इतना ही नहीं, उनकी सेवा पुस्तिका (Service Book) में नियुक्ति तिथि और आदेशों के मिलान में भारी विसंगतियां पाई गई हैं, जिसे ऑडिट टीम ने भी अपनी रिपोर्ट में ‘गंभीर चूक’ माना है।
नसबंदी भत्ता और ऑक्सीजन खरीदी में ‘साठगांठ’
शिकायत में वित्तीय अनियमितताओं के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं:
- नसबंदी भत्ता घोटाला: नियमों के विरुद्ध डॉ. सिंह और उनकी पत्नी (डॉ. अर्चना सिंह) दोनों ने ही नसबंदी के बाद मिलने वाली वेतन वृद्धि का लाभ लिया, जबकि नियमतः केवल एक को ही यह पात्रता थी।
- ऑक्सीजन गैस घोटाला: ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. सिंह ने पहले ट्रांसपोर्ट चार्ज हटाने का आदेश दिया, लेकिन बाद में प्रदायकर्ता फर्म से साठगांठ कर बढ़े हुए दरों पर भुगतान कर दिया, जिससे शासन को भारी आर्थिक क्षति हुई।
शासकीय वाहन का दुरुपयोग और निजी प्रैक्टिस
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि डॉ. सिंह चिकित्सा अधीक्षक के लिए आवंटित ‘टाटा इंडिगो’ वाहन का उपयोग निजी कार्यों के लिए करते थे और साथ ही ‘Conveyance Allowance’ (वाहन भत्ता) भी डकारते रहे। इसके अलावा, नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) लेने के बावजूद वे लगातार निजी पैथोलॉजी लैब का संचालन करते रहे, जो सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है।
जांच समिति की कड़ी टिप्पणी
अधिष्ठाता डॉ. कमल किशोर सहारे की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि डॉ. सिंह के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति, बिना अनुमति अचल संपत्ति की खरीदी और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना (Insubordination) के साक्ष्य मिले हैं। ऑडिट अधिकारियों ने तो यहाँ तक टिप्पणी की है कि ये अपराध “सेवा से बर्खास्तगी” के योग्य हैं।
“डॉ. भानु प्रताप सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग कर शासन को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। हमने सभी साक्ष्य और ऑडिट रिपोर्ट गृहमंत्री और एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंप दी है और जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।” – शक्ति कुमार बघेल, आवेदक
