ग्रामीणों ने गनियारी नायब तहसीलदार के खिलाफ खोला मोर्चा; कलेक्टर कार्यालय में हुई शिकायत, अवैध उत्खनन को संरक्षण देने का आरोप

बिलासपुर:- ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर गनियारी नायब तहसीलदार श्रद्धा सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि नायब तहसीलदार अवैध मुरूम उत्खनन करने वालों को संरक्षण दे रही हैं और कार्यालयीन कार्यों में लापरवाही बरतते हुए अक्सर अनुपस्थित रहती हैं।

भ्रष्टाचार और बदसलूकी का आरोप–
ग्रामीणों ने अपने शिकायत पत्र में उल्लेख किया है कि जब से श्रद्धा सिंह गनियारी में पदस्थ हुई हैं, तब से क्षेत्र में उत्खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा संरक्षण के बदले मोटी रकम की वसूली की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नायब तहसीलदार जनता को आवश्यक सेवाएं देने में विफल रही हैं। कार्यालय पहुंचने वाले ग्रामीणों के साथ उनका व्यवहार रूखा रहता है और कार्यों में लापरवाही के कारण कई मामले लंबित पड़े हैं। इससे किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश है।

पूर्व में भी लग चुके हैं गंभीर आरोप–
यह पहली बार नहीं है जब नायब तहसीलदार श्रद्धा सिंह विवादों में घिरी हों। इससे पहले दिसंबर 2024 में भी उनके खिलाफ कलेक्टर कार्यालय में शिकायतें हो चुकी हैं:

  • सतीश अग्रवाल: इन्होंने शिकायत की थी कि लमेर में खरीदी गई जमीन का ऑनलाइन नामांतरण बिना उचित कारण के खारिज किया गया और जानकारी मांगने पर पैसे की मांग की गई।
  • पंचराम खांडे (घोंघाडीह): इन्होंने रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण के नाम पर बार-बार चक्कर लगवाने और अवैध वसूली का आरोप लगाया था।
  • हिना सिंह ठाकुर व दीपक सिंह ठाकुर: ग्राम टांडा में जमीन नामांतरण को बार-बार निरस्त करने और रिश्वत मांगने की शिकायत इन्होंने भी दर्ज कराई थी।

राजनीतिक संरक्षण की चर्चा–
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि नायब तहसीलदार को कथित तौर पर क्षेत्रीय विधायक और नेताओं का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण उन पर कार्रवाई नहीं हो रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है।

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