बोनस के लिए तरसते अन्नदाता: लोरमी में सहकारी बैंक के बाहर किसानों का भारी हंगामा, सरकार के दावों की खुली पोल

मुंगेली/लोरमी- छत्तीसगढ़ में साय सरकार द्वारा किसानों को धान का बोनस देने के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मुंगेली जिले के लोरमी स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बिलासपुर की शाखा में आज सुबह से ही भारी अफरा-तफरी का माहौल रहा। अपनी मेहनत की कमाई और सरकार द्वारा घोषित बोनस राशि निकालने आए सैकड़ों किसान बैंक की अव्यवस्था और बंद गेट देखकर भड़क गए।

सुबह 5 बजे से लाइन में, फिर भी खाली हाथ
भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच लोरमी क्षेत्र के किसान सुबह 5 बजे से ही बैंक के सामने कतारों में लग गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि दोपहर के 11:30 बज चुके हैं, लेकिन बैंक का चैनल गेट अब तक नहीं खोला गया है। बुजुर्ग किसान और महिलाएं घंटों से बिना पानी और छांव के सड़क पर खड़े रहने को मजबूर हैं।

मौके पर मौजूद किसान नेताओं और आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एक किसान ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा: “हम सुबह 5 बजे से यहां भूखे-प्यासे खड़े हैं। हमें टोकन दे दिया गया है, लेकिन बैंक प्रबंधन का कोई अता-पता नहीं है। सामने होली का त्यौहार है और हमारे पास घर चलाने के लिए पैसे नहीं हैं। सरकार कहती है कि पैसा ट्रांसफर कर दिया गया है, लेकिन बैंक में ताला लटका है।”

भ्रष्टाचार और ‘सुविधा शुल्क’ के गंभीर आरोप– प्रदर्शनकारी किसानों ने बैंक प्रबंधन और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि बोनस की राशि निकालने के नाम पर उनसे ‘कमीशन’ की मांग की जा रही है। आरोप है कि जो किसान रिश्वत देने को तैयार हैं, उन्हें अंदर पिछले दरवाजे से बुलाकर भुगतान किया जा रहा है, जबकि आम किसान घंटों से कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहा है। किसानों ने यह भी बताया कि 1 लाख रुपये के बोनस भुगतान के लिए उन्हें चार-चार किस्तों में बैंक बुलाया जा रहा है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।

न पानी, न बैठने की व्यवस्था – बैंक परिसर के बाहर अव्यवस्था का आलम यह है कि वहां पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। दूर-दराज के गांवों से आए बुजुर्गों के लिए बैठने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। प्रशासन की इस संवेदनहीनता को लेकर किसानों में गहरा रोष है।

विपक्ष ने साधा निशाना– इस घटना को लेकर अब राजनीति भी गरमाने लगी है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह केवल एक बैंक की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में धान खरीदी और बोनस वितरण की प्रक्रिया ठप पड़ी है। सरकार केवल विज्ञापनों में “खुशहाल किसान” की तस्वीर दिखा रही है, जबकि हकीकत में किसान अपने ही पैसे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।

Related posts

Leave a Comment